नई दिल्ली/सियोल: भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बनने वाले सैन्य संबंध पर चीन की गहरी नजर है। खासकर भारत की दक्षिण कोरिया के साथ तोपखाने और एंटी-एयरक्राफ्ट गनों के क्षेत्र में रक्षा उद्योग सहयोग बढ़ाने की कोशिश को चीन अपने लिए संवेदनशील मान रहा है। माना जा रहा है कि भारत इन तोपों को हिमालय में उन क्षेत्रों में तैनाती करेगा जहां चीन से विवाद रहता है। भारत की तीन-दिवसीय यात्रा के दौरान सोमवार को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद, दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने घोषणा की कि सियोल और दिल्ली अपने आर्थिक सहयोग को बेहतर बनाने पर सहमत हो गए हैं। इसके तहत जहाज निर्माण, रक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे अहम क्षेत्रों पर खास ध्यान दिया जाएगा।
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली ने कहा कि दक्षिण कोरिया भारत की “आत्मनिर्भर भारत” नीति का पूरी तरह से समर्थन करता है और उसे उम्मीद है कि वह भारतीय रक्षा उपकरणों के उत्पादन और संचालन में “सक्रिय रूप से” मदद करेगा साथ ही टेक्नोलॉजी के विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर भी चर्चा करेगा। उन्होंने दोनों देशों के रक्षा सहयोग के उदाहरण के तौर पर K-9 थंडर का जिक्र किया जो दक्षिण कोरिया का एक होवित्जर है। दिल्ली के पास K9 वज्र-T 155mm सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर की लगभग 100 यूनिट्स हैं और वह 100 और यूनिट्स खरीदने की योजना बना रहा है।
भारत-दक्षिण कोरिया K-9 वज्र समझौते पर चीन की नजर
आपको बता दें कि K9 वज्र-T भारत में ही बनाया जाता है और यह दक्षिण कोरिया के K9 थंडर डिजाइन पर आधारित है। इसका सिस्टम हान्वा एयरोस्पेस से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए तैयार किया गया था और इसे भारतीय सेना के रेगिस्तानी और ऊंचे पहाड़ी इलाकों के हिसाब से ऑप्टिमाइज किया गया है। भारतीय सेना ने इन होवित्ज़रों को देश के उत्तरी लद्दाख इलाके में तैनात किया है जिसका मकसद चीन और पाकिस्तान के साथ भारत के सीमा तनाव के बीच अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमता को बढ़ाना है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक दिल्ली के विदेश मंत्रालय के पेरियासामी कुमारन ने सोमवार को ली की यात्रा के दौरान कहा कि भारत दक्षिण कोरिया के साथ अपने रक्षा उद्योग सहयोग को “तीसरे चरण” तक विस्तार देना चाहता है।










































