पाकिस्तान के रुख का समर्थन करते हुए एर्दोगन ने मंगलवार को कहा कि कश्मीर मसले का हल बातचीत के जरिए होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘दक्षिण एशिया में कश्मीर सहित सभी विवादों का हल संयुक्त राष्ट्र के ढांचे एवं प्रासंगिक प्रस्तावों के तहत बातचीत के जरिए होना चाहिए।’Erdogan raises Kashmir issue : तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगदन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए एक बार फिर कश्मीर राग अलापा है। पाकिस्तान के रुख का समर्थन करते हुए एर्दोगन ने मंगलवार को कहा कि कश्मीर मसले का हल बातचीत के जरिए होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘दक्षिण एशिया में कश्मीर सहित सभी विवादों का हल संयुक्त राष्ट्र के ढांचे एवं प्रासंगिक प्रस्तावों के तहत बातचीत के जरिए होना चाहिए।’
भारत ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
भारत ने तुर्किये के राष्ट्रपति की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और स्पष्ट किया कि यह मामला पूरी तरह द्विपक्षीय है तथा इसमें किसी बाहरी पक्ष की भागीदारी की आवश्यकता नहीं है। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था, ‘कश्मीर मुद्दे पर हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। जहां तक मध्यस्थता का सवाल है, भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दों में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की कोई आवश्यकता नहीं है।’
2024 में एर्दोगन ने कश्मीर का जिक्र नहीं किया
हालांकि, 2024 में एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अपने भाषण के दौरान जम्मू-कश्मीर का जिक्र नहीं किया था। इससे पहले फरवरी 2025 में तुर्किये के राष्ट्रपति पाकिस्तान के दौरे पर गए थे और कश्मीर मुद्दे पर बात की थी। 13 फरवरी 2025 को इस्लामाबाद में एक मीडिया बातचीत के दौरान एर्दोगन ने कहा था कि कश्मीर मुद्दे का समाधान भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत के जरिए होना चाहिए।तुर्किये के राजदूत के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया
उन्होंने कहा था, “कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के अनुरूप, बातचीत के जरिए और कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए हल किया जाना चाहिए। हमारी सरकार और हमारा देश, जैसा कि अतीत में रहा है, आज भी अपने कश्मीरी भाइयों के साथ एकजुटता में खड़ा है।” इसके बाद भारत ने कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के अनुरूप हल करने की तुर्किये राष्ट्रपति की अपील को खारिज कर दिया था और इन अनुचित एवं अस्वीकार्य टिप्पणियों को लेकर तुर्किये के राजदूत के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
जायसवाल ने कहा था, “हम भारत के आंतरिक मामलों से जुड़ी ऐसी आपत्तिजनक टिप्पणियों को खारिज करते हैं। हमने दिल्ली में तुर्किये के राजदूत के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से संबंधित ऐसी अनुचित टिप्पणियां स्वीकार्य नहीं हैं। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। किसी अन्य देश का इस पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।”










































