अट्टा-सट्टा प्रथाः विदिशा में 22 साल की युवती और 15 साल के किशोर की हो रही थी शादी, तीनों जोड़े आपस में भाई-बहन थे

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विदिशा। समाज में जड़ जमा चुकी कुरीतियों और परंपराओं का मोह आज भी आधुनिकता पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। जिले के बासौदा तहसील अंतर्गत ग्राम मुरादाबाद के हनुमान मंदिर में एक ऐसा ही मामला सामने आया, जहां अट्टा-सट्टा की प्रथा के फेर में एक 15 साल के किशोर का विवाह 22 साल की युवती के साथ कराया जा रहा था।

जब तक गठबंधन जुड़ता और सात फेरे होते, प्रशासन की टीम ने मौके पर दबिश देकर इस बाल विवाह को रुकवा दिया। इस पूरे घटनाक्रम के पीछे अट्टा-सट्टा यानी रिश्तों की अदला-बदली की पुरानी प्रथा मुख्य वजह रही।

बाल विवाह की गोपनीय सूचना मिली थी

सोशल वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन टीम की जिला प्रभारी दीपा शर्मा ने बताया कि उन्हें इस बाल विवाह की गोपनीय सूचना मिली थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी विनीता कांसवा को सूचित किया गया, जिन्होंने तत्काल एक विशेष टीम का गठन कर मौके पर भेजा।

दस्तावेजों की जांच में स्थिति चौंकाने वाली निकली

जब टीम ग्राम मुरादाबाद स्थित हनुमान मंदिर पहुंची, तो वहां विवाह की तैयारियां जोरों पर थीं। मौके पर तीन जोड़ों का विवाह संपन्न होना था। टीम ने जब वर-वधू के दस्तावेजों की जांच की, तो स्थिति चौंकाने वाली निकली। दो जोड़े तो बालिग थे, लेकिन तीसरे जोड़े में लड़के की उम्र मात्र 15 वर्ष थी, जबकि लड़की की उम्र 22 वर्ष पाई गई।

उलझा हुआ था रिश्तों का ताना-बाना

जांच में यह भी सामने आया कि ये तीनों जोड़े आपस में भाई-बहन थे। अट्टा-सट्टा प्रथा के तहत एक परिवार अपनी बेटी की शादी जिस घर में कर रहा था, उसी घर की बेटी को अपने बेटे के लिए बहू बनाकर ला रहा था। चूंकि एक जोड़ा नाबालिग निकल गया, इसलिए कड़ी के रूप में जुड़े अन्य दो बालिग जोड़ों का विवाह भी कानूनन नहीं हो सका।

स्वजनों को दी गई समझाइश

परिजनों ने प्रथा का हवाला देते हुए तर्क दिया कि उनके यहां इसी तरह अदला-बदली से शादियां होती हैं। टीम ने सख्त लहजे में उन्हें कानून का पाठ पढ़ाया और बाल विवाह के दुष्परिणामों से अवगत कराया। काउंसलिंग के बाद स्वजन अपनी गलती मानने को तैयार हुए और विवाह रोकने पर सहमति दी। टीम ने स्वजनों को दोबारा ऐसा ना करने की चेतावनी दी है।

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