अप्रैल में 8.5% भागे Sensex-Nifty, लेकिन क्यों अब भी लाल आपका पोर्टफोलिया, क्या है रिकवरी का पूरा सच?

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अप्रैल 2026 में भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत वापसी की है। Sensex-Nifty में इस दौरान 8.5% की तेजी आई है, लेकिन ये अब भी ज्यादातर रिटेल निवेशकों के पोर्टफोलियो लाल हैं। ऐसे में अगर आपके दिमाग में भी यह सवाल उठ रहा है कि बाजार इतना उठ गया, फिर भी आप नुकसान में क्यों हैं, तो इसका आसान जवाब है, रिकवरी का छिपा हुआ सच। भले ही अप्रैल में सेंसेक्स-निफ्टी में 8.5 फीसदी से ज्यादा की तेजी आ चुकी है। लेकिन, बाजार अब भी प्री-वॉर लेवल से करीब 5% नीचे हैं। अप्रैल की तेजी ने बाजार में भरोसा जरूर लौटाया है, लेकिन अभी पूरी रिकवरी बाकी है। जियोपॉलिटिकल स्थिरता, कच्चे तेल की दिशा और कॉरपोरेट कमाई आने वाले महीनों में बाजार की दिशा तय करेंगे। फिलहाल, वैल्यूएशन और घरेलू मजबूती निवेशकों के लिए अवसर का संकेत दे रहे हैं।

रिकवरी, लेकिन गैप बाकी

अप्रैल की शुरुआत से भारतीय बाजार में तेज रिकवरी देखने को मिली है। नौ में से सात सत्रों में बढ़त के साथ Sensex और Nifty दोनों में करीब 8.5% की तेजी दर्ज की गई।

इसके बावजूद बाजार अभी भी US-ईरान युद्ध से पहले के स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। Sensex अपने 26 फरवरी के 82,250 के स्तर से करीब 4,180 अंक नीचे है, जबकि Nifty भी 25,500 के स्तर से लगभग 1,275 अंक यानी करीब 5% नीचे ट्रेड कर रहा है।

ग्लोबल संकेतों से मिला सपोर्ट

बाजार की इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण जियोपॉलिटिकल तनाव में कमी है। दो हफ्ते का सीजफायर और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित बातचीत ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।

ग्लोबल मार्केट्स में भी रिकवरी देखने को मिली है। चीन, ताइवान और सिंगापुर के बाजार अपने नुकसान की भरपाई कर चुके हैं, जबकि अमेरिका का S&P 500 भी रिकॉर्ड हाई के करीब पहुंच गया है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतें अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जो भारत के लिए महंगाई और फिस्कल बैलेंस पर जोखिम बना हुआ है।

मजबूत घरेलू फैक्टर्स से सहारा

भारत अब भी ग्लोबल अनिश्चितता के बीच सबसे मजबूत बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है। इसकी वजह मजबूत घरेलू मांग, सरकार का कैपेक्स, आसान मौद्रिक नीति और बेहतर कॉरपोरेट बैलेंस शीट है। लेकिन, निकट अवधि में कंपनियों की कमाई पर दबाव रह सकता है, खासकर बढ़ती ऊर्जा लागत और सप्लाई चेन बाधाओं के कारण। लेकिन अगर हालात सामान्य होते हैं, तो साल के दूसरे हिस्से में कमाई में सुधार संभव है।

वैल्यूएशन हुए आकर्षक

हाल की गिरावट के बाद बाजार के वैल्यूएशन अब ज्यादा आकर्षक हो गए हैं। Nifty का एक साल फॉरवर्ड P/E मार्च में गिरकर 17.7 पर आ गया, जो इसके लॉन्ग टर्म औसत 20.9 से करीब 15% कम है। इसके अलावा Nifty 50, Midcap और Smallcap इंडेक्स के वैल्यूएशन अपने सितंबर 2024 के पीक से क्रमशः 28%, 29% और 18% तक नीचे आ चुके हैं। लेकिन, पिछले एक साल के पैटर्न को देखकर बड़ी संख्या में निवेशक निराश हैं और बाजार में आने से कतरा रहे हैं।

क्या संकेत दे रहे टेक्निकल

टेक्निकल चार्ट्स पर भी बाजार की तस्वीर सुधरती दिख रही है। एनालिस्ट्स के मुताबिक, जब तक Nifty 23,500–23,550 के सपोर्ट जोन के ऊपर बना रहता है, तब तक यह 24,000–24,300 के स्तर की ओर बढ़ सकता है। डेली चार्ट पर बना लंबा ग्रीन कैंडल और हायर लो फॉरमेशन यह संकेत दे रहा है कि बाजार में तेजी का ट्रेंड धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है।

95,000 तक जा सकता है

Morgan Stanley ने भारतीय बाजार पर बड़ा बुलिश दांव लगाया है। ब्रोकरेज के मुताबिक, दिसंबर 2026 तक Sensex 95,000 के स्तर तक पहुंच सकता है, जो मौजूदा स्तर से करीब 22% की संभावित तेजी दिखाता है। बुलिश परिदृश्य में, जहां कच्चा तेल 70 डॉलर से नीचे आता है और ग्रोथ मजबूत रहती है, Sensex 1,07,000 तक भी जा सकता है।

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