अंकारा: भारत दोस्त रूस से दशकों से हथियार खरीदता रहा है। भारतीय सेनाओं के करीब 70 फीसदी हथियार रूसी मूल के हैं। रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद से भारत और रूस के बीच इस हथियार दोस्ती पर अमेरिका के CAATSA प्रतिबंधों का खतरा मंडराने लगा है। भारत को रूस से हथियार खरीदने से पहले अमेरिकी CAATSA प्रतिबंधों के खतरे का सामना करना पड़ता है। अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की को CAATSA प्रतिबंधों से हटाने जा रहे हैं। दरअसल, तुर्की ने अमेरिका के प्रतिबंधों के बाद भी रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा था। इसके बाद अमेरिका ने नाटो देश तुर्की को एफ-35 फाइटर जेट से बाहर कर दिया था।
एक्सपर्ट का कहना है कि ट्रंप के इस ऐलान से अब भारत और इंडोनेशिया जैसे देशों को बड़ी राहत मिल सकती है जो बड़े पैमाने पर रूसी हथियार खरीदते हैं। ट्रंप ने तुर्की के अंकारा शहर में चल रहे नाटो के शिखर सम्मेलन में कहा कि वह तुर्की को अमेरिका के ब्लैक लिस्ट से निकालने पर काम कर रहे हैं जिसे खुद उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में लगाया था। ट्रंप ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन को अपना मित्र बताया। ट्रंप ने एर्दोगन के सामने कहा, ‘हम प्रतिबंधों को खत्म करने जा रहे हैं। अब ठीक है?’
ट्रंप ने CAATSA पर क्या कहा?
ट्रंप ने कहा, ‘अब इसे करने का समय आ गया है। हम अपने दोस्तों पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहते हैं। यह बहुत आसान है।’ ट्रंप के इस ऐलान के बाद एर्दोगन मुस्करा उठे। अमेरिका ने तुर्की के खिलाफ Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act लगा रखा है। इसे CAATSA के नाम से भी जाना जाता है। इस लिस्ट में रूस, ईरान और उत्तर कोरिया शामिल हैं लेकिन रूस से एस-400 खरीदने के बाद तुर्की भी इसमें शामिल हो गया था। इस कानून को साल 2017 में लागू किया गया था। अमेरिका ने तुर्की एफ-35 प्रोग्राम से इसलिए बाहर कर दिया था क्योंकि अंकारा ने रूस से एस-400 खरीदा था।
अमेरिका को डर था कि एस-400 के एक्टिव रहने पर रूस को अमेरिकी एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट की कमी पता चल जाएगी। अब ट्रंप के ऐलान के बाद तुर्की को उम्मीद है कि उसे एफ-35 फाइटर जेट प्रोग्राम में फिर से शामिल किया जाएगा। ट्रंप ने भी इजरायली पीएम नेतन्याहू के कड़े विरोध के बाद भी संकेत दिए हैं कि तुर्की को एफ-35 फाइटर जेट दिया जाएगा। पांचवीं पीढ़ी का यह फाइटर जेट रडार की पकड़ में नहीं आता है और ईरान युद्ध में इसने जमकर तबाही मचाई थी। अमेरिका का कहना है कि तुर्की को इस छूट के बाद S-400 को बेकार करना होगा लेकिन तुर्की की ओर से ऐसा कुछ नहीं कहा गया है।










































