मकान खाली करने के दबाव में महिला को आया अटैक, कॉलोनी में बढ़ा तनाव,

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शहर के सिविल लाइन क्षेत्र स्थित आकाशवाणी कार्यालय के बाजू से लगी कॉलोनी में इन दिनों प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। कॉलोनीवासियों को प्रशासन द्वारा मकान खाली करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन यहां रहने वाले लोग मकान छोड़ने को तैयार नहीं हैं। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि बीते दिनों तहसीलदार कॉलोनी में पहुंचे थे और लोगों को जल्द मकान खाली करने के निर्देश दिए थे। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लोगों को इस कदर डराया और दबाव बनाया गया कि कॉलोनी में रहने वाली लगभग 50 वर्षीय एक वृद्ध महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई। जिसे निजी अस्पताल में भर्ती किया गया है, जहाँ डाक्टरों ने परिजन को बताया की महिला को अटैक आया था, अभी महिला आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है। महिला की बेटी ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और निजी अस्पताल में इलाज कराने के लिए भी उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मां के साथ कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए तहसीलदार और जिला प्रशासन जिम्मेदार होगा। वहीं कॉलोनीवासियों का कहना है कि उनके पास रहने के लिए कोई दूसरी व्यवस्था नहीं है। उनका आरोप है कि प्रशासन बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए मकान खाली कराने का दबाव बना रहा है। लोगों का कहना है कि वर्षों से वे इसी कॉलोनी में रह रहे हैं और अचानक मकान खाली करने के आदेश से उनके सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

शहर के वार्ड क्रमांक 23 स्थित आकाशवाणी कॉलोनी और वेटरिनरी कॉलोनी में रहने वाले लगभग 72 परिवार इन दिनों गहरी चिंता और असमंजस के बीच जीवन गुजार रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा कुछ महीने पहले इन परिवारों को शासकीय जमीन पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के आदेश जारी किए गए थे। इसके बाद से लगातार प्रशासनिक कार्रवाई और मकान खाली कराने की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन अब तक प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और व्यवस्थापन को लेकर कोई ठोस समाधान सामने नहीं आने से वार्डवासियों में भारी नाराजगी और भय का माहौल बना हुआ है। जानकारी के अनुसार बीते दिनों वार्डवासियों ने जिला प्रशासन और नगर पालिका से मांग की थी कि यदि उन्हें यहां से हटाया जा रहा है तो पहले उनके रहने के लिए वैकल्पिक स्थान और उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। उस दौरान कुछ जनप्रतिनिधियों और नगर पालिका द्वारा व्यवस्थापन का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी अब तक न तो उन्हें कोई जमीन दी गई और न ही पुनर्वास की कोई व्यवस्था की गई है। इसी बीच कुछ परिवारों ने मजबूरी में धीरे-धीरे अपने मकान खाली करना शुरू कर दिया है, लेकिन कई ऐसे परिवार भी हैं जिनके पास रहने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। ऐसे परिवारों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत और मजदूरी के बाद यहां अपने छोटे-छोटे मकान बनाए थे और अब अचानक उन्हें उजाड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि वे अब यहां से कहीं नहीं जाएंगे, चाहे प्रशासन उनके घरों पर बुलडोजर ही क्यों न चला दे। वार्डवासियों ने प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि 14 मई को बालाघाट तहसीलदार कॉलोनी के निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने लोगों को जल्द से जल्द मकान खाली करने के लिए कहा। वार्डवासियों के अनुसार तहसीलदार ने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दो दिनों के भीतर मकान खाली नहीं किए गए तो प्रशासन बुलडोजर चलाकर मकानों को हटा देगा।

मुन्नीबाई पटले को आया हार्ट अटैक

कॉलोनी में रहने वाली मुन्नीबाई पटले नामक महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों का आरोप है कि प्रशासनिक दबाव और मकान टूटने के डर के कारण उन्हें गहरा सदमा लगा और उन्हें अटैक आ गया। इसके बाद उन्हें तत्काल एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने हार्ट अटैक जैसी स्थिति बताकर उन्हें आईसीयू में भर्ती किया है। मुन्नीबाई पटले की बेटी पूनम नागदेवे ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि उनकी मां पहले पूरी तरह स्वस्थ थीं। वे खुद भी बाहर रहती हैं और हाल ही में अपनी मां से मिलने यहां आई थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा मकान खाली कराने और बुलडोजर चलाने की बात कहे जाने के बाद उनकी मां की हालत बिगड़ गई। पूनम का कहना है कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे निजी अस्पताल का खर्च उठा सकें। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग की है। पूनम नागदेवे ने यह भी कहा कि यदि उनकी मां के साथ कोई अनहोनी होती है तो उसके लिए बालाघाट तहसीलदार और जिला प्रशासन जिम्मेदार होगा।

अपने प्राण त्याग देंगे लेकिन अपना घर नहीं छोड़ेंगे

कॉलोनी में रहने वाली पुष्पा बोरकर और चित्ररेखा सेंद्रे ने भी अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा स्थान नहीं है। उन्होंने बताया कि बड़ी मुश्किलों और वर्षों की मेहनत के बाद उन्होंने यह मकान बनाए थे। अब प्रशासन द्वारा अचानक मकान खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे पूरा परिवार मानसिक तनाव में है। महिलाओं का कहना है कि भीषण गर्मी के इस मौसम में वे इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। किराए के मकान तलाशने पर भी उन्हें मकान नहीं मिल रहा है। कई लोग उनसे पूछते हैं कि क्या वे सरकारी नौकरी में हैं, और जवाब न मिलने पर मकान देने से मना कर देते हैं। उनका कहना है कि प्रशासन ने उन्हें केवल 20 मई तक का समय दिया है और उसके बाद बुलडोजर चलाने की बात कही जा रही है। वार्डवासियों ने भावुक होते हुए कहा कि वे अपने मकान खाली नहीं करेंगे। उनका कहना है कि यदि प्रशासन बुलडोजर चलाएगा तो वे अपने घरों के सामने खड़े हो जाएंगे। महिलाओं ने यहां तक कहा कि वे अपने प्राण त्याग देंगे लेकिन अपना घर नहीं छोड़ेंगे।

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