बलूचिस्तान ने 1948 में पाकिस्तान के खिलाफ भारत से मांगी थी मदद, दिल्‍ली आया था सीक्रेट दूत, आज तक है विवाद

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इस्लामाबाद: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बीते कुछ महीनों में कई बड़े विरोध प्रदर्शन हुए हैं। लोग सड़कों पर हैं तो सशस्त्र गुटों ने भी पाकिस्तान के सुरक्षाबलों को निशना बनाया है। दूसरी ओर पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान में बड़े पैमाने पर स्थानीय नेताओं की गिरफ्तारी और हथियारबंद गुटों पर हमले किए हैं। इस बीच एक बलूच नेता मीर यार ने सोशल मीडिया पर दावा कर दिया कि बलूचिस्तान अब पाकिस्तान से आजाद हो गया है। इससे एक बार फिर ये इलाका दुनियाभर में चर्चा में आ गया है, जो 1947 से ही इस्लामाबाद के लिए संवेदनशील रहा है। इस सूबे का बंटवारे के पहले और बाद का इतिहास भी दिलचस्प है।

न्यूज18 की रिपोर्ट कहती है कि हाल की घटनाओं ने बलूचिस्तान के राजनीतिक इतिहास, खासतौर 1948 में कलात रियासत के पाकिस्तान में विलय की दशकों पुरानी बहस को हवा दी है। पाकिस्तान कहता है कि कलात शासक ने स्वेच्छा से विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। दूसरी ओर बलूच समूह कहते हैं कि यह विलय सैन्य दबाव और स्थानीय राजनीतिक प्रतिनिधियों की इच्छा के खिलाफ किया गया था।

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