नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उथल-पुथल के बीच दुनिया पर एक और ऑयल शॉक (तेल का झटका) का खतरा मंडराने लगा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने समुद्र में मौजूद रूसी कच्चे तेल की खरीद पर दी गई प्रतिबंधों की अस्थायी छूट को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। इससे 16 मई की समयसीमा समाप्त होने के बाद यह छूट अब खत्म हो गई है। अमेरिकी सरकार के इस कड़े फैसले से भारत और इंडोनेशिया जैसे उन देशों को बड़ा झटका लगा है, जो पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध के बीच अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए सस्ते रूसी तेल पर निर्भर थे।क्या थी यह अमेरिकी छूट?
पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसी संकट से निपटने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को काबू में रखने के लिए वाशिंगटन ने मार्च में पहली बार एक विशेष छूट जारी की थी।
इस छूट के तहत उन रूसी तेल टैंकरों से खरीद की इजाजत दी गई थी, जिन पर तेल पहले से लोड किया जा चुका था। बाद में आयात करने वाले देशों के दबाव में आकर अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने इसे अप्रैल में 16 मई तक के लिए बढ़ा दिया था।
भारत ने की थी छूट बढ़ाने की मांग
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस डेडलाइन से ठीक पहले भारत ने अमेरिका से इस छूट को आगे बढ़ाने का पुरजोर आग्रह किया था। भारतीय अधिकारियों ने वाशिंगटन से ये बातें कही थीं:
ईंधन की बढ़ती लागत का खामियाजा पहले ही देश के आम परिवारों को भुगतना पड़ रहा है, जिससे रसोई गैस की किल्लत जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
वैश्विक तेल बाजार में जारी उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारत की 1.4 अरब आबादी और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।










































