भोपाल: मध्य प्रदेश कांग्रेस अपने विधायकों को रिसॉर्ट पॉलिटिक्स के जरिए सहेजने और क्रॉस वोटिंग से बचाने के ताने-बाने बुन रही थी, ठीक उसी वक्त पार्टी के भीतर से एक ऐसी आवाज उठी, जिसे आलाकमान ने पूरी तरह अनसुना कर दिया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने सोशल मीडिया से लेकर दिल्ली दरबार तक सीधे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को टैग करते हुए साफ शब्दों में आगाह किया था कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा उम्मीदवार चुनने में बहुत बड़ी चूक की जा रही है। आज जब बिना वोटिंग के बीजेपी ने तीसरी सीट अपनी झोली में डाल ली, तो ज्ञानचंदानी की वही बातें कांग्रेस को सबसे ज्यादा चुभ रही हैं।दिग्विजय सिंह को न लाने का खामियाजा भुगता
नरेश ज्ञानचंदानी का यह तर्क अब राजनीतिक गलियारों में सच की तरह गूंज रहा है कि अगर पार्टी दिग्विजय सिंह के नाम पर मुहर लगाती, तो उनका जमीनी मैनेजमेंट और कानूनी समझ ऐसी किसी भी तकनीकी चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ती। वरिष्ठ पत्रकार प्रभु पटेरिया समेत तमाम विश्लेषक भी अब ज्ञानचंदानी के सुर में सुर मिला रहे हैं। दिग्गजों का मानना है कि पार्टी नेतृत्व विधायकों की गिनती में इतना उलझ गया कि फॉर्म की बुनियादी जांच जैसी जरूरी चीज ही भूल गया। अमित शाह की एडवांस प्लानिंग ने कांग्रेस की इसी संगठनात्मक ढिलाई को पकड़ लिया और पूरा पासा ही पलट दिया।










































