इनसॉल्वेनसी नियमों में बदलाव की तैयारी, समय पर मिलेगा घर खरीदारों को अपना आशियाना

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रियल एस्टेट सेक्टर में अधूरी परियोजनाओं को संकट से उबारने के लिए 2016 में लाए गए इनसॉल्वेंसी व बैंकरप्सी कोड (Insolvency & Bankruptcy Code) 2016 में बदलाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। बता दें कि राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने कहा है कि रियल एस्टेट कंपनियों के खिलाफ शुरू की गई कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) केवल उसी प्रोजेक्ट तक सीमित रहेगी जिसमें चूक (डिफॉल्ट) हुई है। अपीलीय न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया है कि इसे कॉरपोरेट देनदार की अन्य प्रोजेक्ट तक नहीं बढ़ाया जाएगा। इस फैसले से एक प्रोजेक्ट की गलती की सजा पूरी कंपनी को नहीं मिलेगी और दूसरे प्रोजेक्ट का काम बिना किसी परेशानी से पूरा हो पाएगा। इससे न सिर्फ रियल एस्टेट सेक्टर को फायदा मिलेगा बल्कि घर खरीदों को समय पर आशियाना मिल पाएगा।

सुधार के लिए दिए गए ये सुझाव

Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) की कमेटी ने रियल एस्टेट सेक्टर में इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए करीब 55 सुझाव दिए हैं। कमेटी का मानना है कि मौजूदा नियमों की वजह से कई हाउसिंग प्रोजेक्ट अटक जाते हैं और घर खरीदारों को समय पर फ्लैट नहीं मिल पाता।

  • कमेटी ने कहा है कि अगर किसी रियल एस्टेट कंपनी पर आर्थिक संकट आता है, तो पूरी कंपनी को दिवालिया मानने के बजाय सिर्फ उस प्रोजेक्ट पर इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया लागू होनी चाहिए जो फंसा हुआ है। इससे बाकी प्रोजेक्ट्स पर असर नहीं पड़ेगा।
  • कमेटी ने यह भी सुझाव दिया है कि फोकस केवल पैसा वसूलने पर नहीं, बल्कि अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा कराने पर होना चाहिए ताकि घर खरीदारों को उनका घर मिल सके।
  • इसके अलावा रेरा और IBC कानून के बीच बेहतर तालमेल बनाने की बात कही गई है ताकि निर्माण कार्य तेजी से पूरा हो सके।
  • कमेटी ने ‘रिवर्स इनसॉल्वेंसी’ प्रक्रिया को बढ़ावा नहीं देने की सलाह दी है। साथ ही सुझाव दिया गया है कि प्रोजेक्ट पर लगने वाले पेनल्टी ब्याज, बकाया और रिकवरी कार्रवाई को तब तक रोका जाए जब तक प्रोजेक्ट को OC/CC (ऑक्यूपेंसी/कम्प्लीशन सर्टिफिकेट) नहीं मिल जाता।
  • सुझावों में यह भी कहा गया है कि इनसॉल्वेंसी शुरू होते ही किसी बड़े तकनीकी संस्थान से प्रोजेक्ट का पूरा ऑडिट कराया जाए, ताकि यह पता चल सके कि कितना निर्माण बाकी है और उसे पूरा करने में कितनी लागत और समय लगेगा।
  • कमेटी ने यह भी सिफारिश की है कि रेरा द्वारा प्रोजेक्ट के बैंक अकाउंट फ्रीज न किए जाएं, ताकि निर्माण कार्य रुके नहीं।घर खरीदारों को होगा सबसे अधिक फायदा
  • रियल एस्टेट एक्सपर्ट का कहना है कि दिवालिया कानून में बदलाव का सीधा लाभ यह होगा केवल संकट ग्रस्त परियोजना का समाधान निकाला जाएगा और शेष परियोजनाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। रीयरको द्वारा एनसीएलटी से केवीडी विंड पार्क निकालकर निर्माण पूर्ण किया जा रहा है। संस्थान की एमडी गीतांजलि खन्ना का कहना है कि इनसॉल्वेनसी प्रोसेस में प्राथमिकता प्रोजेक्ट का समाधान निकालने पर होनी चाहिए और इसके लिए उसका बनकर पूरा होना बहुत जरूरी है जिससे मौजूद हितधारकों से बकाया सहित नए खरीदारों के निवेश के अनुकूल माहौल बनाया जा सके।
  • डिलीजेन्ट बिल्डर्स के सीओओ ले.क. अश्वनी नागपाल (रि) का मानना है कि कुछ परियोजनाओं में इनसॉल्वेनसी ही एक मात्र उपाय होता है लेकिन एक परियोजना में हुई गलत वित्तीय प्रबंधन का प्रभाव पूरे संस्थान पर नहीं पड़ता है, इसलिए इनसॉल्वेनसी प्रोसेस केवल प्रभावित परियोजना तक सीमित रखना परियोजना को जल्द रीवाइव करने में मदद करेगा। मार्केट एक्स्पर्ट्स का मानना है कि इनसॉल्वेनसी झेल रही परियोजना के लिय कम से कम समय में समाधान के सभी संभव उपाय खुले रहने चाहिए और इसके लिए रिवर्स इनसॉल्वेनसी को अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि इस माध्यम से उमंग रियलटेक ने विन्टर हिल्स 77, गुरुग्राम और आरजी ग्रुप ने लक्जरी होम्स, ग्रेटर नोएडा में परियोजना पूरी की है।

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