चीनी दादागिरी का तोड़ मिल गया, भारत का पड़ोसी मुस्लिम देश जमकर न‍िकाल रहा रेयर अर्थ, पलटेगी बाजी!

0

क्‍वालालंपुर: फाइटर जेट से लेकर स्‍मार्टफोन चिप तक दुनियाभर के देश आज रेयर अर्थ म‍िनरल के बिना रह नहीं सकते हैं। रेयर अर्थ खनिजों पर चीन का लगभग कब्‍जा है और इसी वजह से वह दुनिया को धमकाता रहता है। चीन ने सबसे पहले जापान को रेअर अर्थ देने से मना किया था। चीन अब इसे हथियार बना चुका है और अमेरिका से लेकर भारत तक धमका रहा है। इसी वजह से दुनियाभर में रेयर अर्थ को हासिल करने के लिए युद्धस्‍तर पर प्रयास किया जा रहा है। जापान ने तो समुद्र के कीचड़ से रेअर अर्थ निकाला है। वहीं अब भारत के पड़ोसी दक्षिण पूर्वी एशियाई मुस्लिम देश मलेशिया से भी जमकर रेअर अर्थ निकाला जा रहा है। इससे दुनिया को अब चीन का एक बड़ा व‍िकल्‍प मिल गया है। मलेशिया के पास कुल 16.1 से 16.2 म‍िल‍ियन म‍िट्रिक टन रेअर अर्थ भंडार का अनुमान है।

पूर्वी मलेशिया के गेबेंग इलाके में जमकर रेअर अर्थ म‍िनरल को न‍िकाला जा रहा है और इसे रिफाइनरी तक पहुंचाया जा रहा है। स्‍मार्टफोन, फाइटर जेट, इलेक्ट्रिक कार और विंड टर्बाइन की बिना रेअर अर्थ खनिजों के कल्‍पना भी नहीं की जा सकती है। दुनिया में जैसे जैसे एआई का प्रयोग बढ़ रहा है, रेअर अर्थ खनिजों की मांग और बढ़ती जा रही है। चीन ने जब दुनिया में रेअर अर्थ को हथियार बनाया तो ऑस्‍ट्रेलिया की व‍िशाल खनन कंपनी Lynas ऐक्‍शन में आई। इसने भी मलेशिया में रेअर अर्थ के रिफाइनिंग में अपना फोकस किया। कंपनी को उम्‍मीद है कि वह 10 फीसदी रेअर अर्थ बाजार पर कब्‍जा कर सकती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here