देश में स्वच्छ ईंधनों के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए केंद्र सरकार ने हाइड्रोजन, LPG, एलएनजी और CNG ईंधन वितरण इकाइयों के सत्यापन नियमों में अहम बदलाव किया है। उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने विधिक माप विज्ञान नियमों में संशोधन करते हुए अब सरकार से मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्रों को इन ईंधन डिस्पेंसरों के सत्यापन की अनुमति दे दी है। सरकार के इस कदम से पेट्रोल पंप और डीलर के यहां सही माप को लेकर जो घपलेबाजी चल रही थी, उस पर लगाम लगेगी।
विधिक माप विज्ञान नियमों में संशोधन
पीटीआई/भाषा के मुताबिक उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने विधिक माप विज्ञान (सरकार से मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्र) नियम, 2013 में संशोधन किया है। इस बदलाव के बाद सरकार से मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्र यानी जीएटीसी अब हाइड्रोजन, एलपीजी, एलएनजी और सीएनजी डिस्पेंसरों का सत्यापन और पुनः सत्यापन कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि इससे सत्यापन सेवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी और प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और प्रभावी होगी। साथ ही स्वच्छ ईंधनों को अपनाने को भी बढ़ावा मिलेगा।
18 से बढ़कर 23 हुई उपकरणों की श्रेणी
संशोधित नियमों के तहत अब सत्यापन के दायरे में आने वाले उपकरणों की संख्या 18 से बढ़ाकर 23 कर दी गई है। इससे नई तकनीक और आधुनिक ईंधन वितरण प्रणालियों को भी कानूनी निगरानी व्यवस्था के तहत लाया जा सकेगा। यह कदम भविष्य में बढ़ने वाले ग्रीन फ्यूल नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। खासतौर पर हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को देखते हुए यह बदलाव जरूरी माना जा रहा था।अलग-अलग ईंधनों के लिए तय हुआ शुल्क
नए नियमों के तहत पेट्रोल और डीजल वितरण इकाइयों के सत्यापन के लिए 5,000 रुपये प्रति नोजल शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन वितरण इकाइयों के लिए यह शुल्क 10,000 रुपये प्रति नोजल रखा गया है। नोजल वह उपकरण होता है, जो ईंधन भरने वाले पाइप के अंतिम हिस्से में लगा रहता है और जिसके माध्यम से वाहन में ईंधन भरा जाता है।
क्या होते हैं जीएटीसी?
जीएटीसी यानी सरकार से मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्र निजी संस्थान होते हैं, जिनके पास माप एवं तौल उपकरणों के सत्यापन की तकनीकी विशेषज्ञता होती है। ये केंद्र विधिक माप विज्ञान अधिनियम के तहत निर्धारित मानकों के अनुसार उपकरणों की जांच और प्रमाणन का काम करते हैं। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से देश में ईंधन वितरण प्रणाली ज्यादा पारदर्शी, भरोसेमंद और उपभोक्ता हितैषी बनेगी।










































