अगर एंड्रॉयड फोन इस्तेमाल करते हैं, तो आपने भी महसूस किया होगा कि जितना बढ़िया Gemini काम करता है, वैसा दूसरे AI असिस्टेंट नहीं करते हैं। लेकिन आने वाले समय में यह समस्या दूर हो सकती है। सिर्फ गूगल का Gemini ही नहीं, बल्कि ChatGPT, Perplexity या दूसरे AI असिस्टेंट भी उसी तरह काम कर सकते हैं। इसकी वजह है यूरोपीय संघ (EU) का नया फैसला।
EU का मानना है कि गूगल अपने एंड्रॉयड सिस्टम में Gemini को ज्यादा सुविधाएं देता है, जबकि दूसरी कंपनियों के AI को वैसी पहुंच नहीं मिलती। इसलिए EU ने गूगल से कहा है कि वह एंड्रॉयड को इस तरह बदले ताकि बाकी AI कंपनियों को भी बराबर का मौका मिले।
विवाद की वजह क्या है?
आज दुनिया के ज्यादातर स्मार्टफोन गूगल के Android ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलते हैं। फोन में पहले से गूगल की कई सेवाएं मौजूद रहती हैं। इनमें गूगल सर्च, क्रोम, प्ले स्टोर और अब Gemini भी शामिल है। Gemini को फोन के सिस्टम के अंदर तक पहुंच मिलती है। वह वॉइस कमांड से शुरू हो सकता है, कई ऐप्स के साथ मिलकर काम कर सकता है और फोन के कई फीचर्स को सीधे कंट्रोल भी कर सकता है। लेकिन ChatGPT या दूसरा AI असिस्टेंट इसी तरह फोन में सर्विस देना चाहे, तो उसे वैसी पहुंच नहीं मिलती। EU का कहना है कि इससे बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा नहीं हो पाती है।












































