वन विभाग की सुस्त कार्यवाही पर उठे सवाल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य की गिरफ्तारी के बाद भी सिंडिकेट का जाल नहीं टूटा
पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। वारासिवनी वन परिक्षेत्र में खैर की बेसकीमती लकडीय़ों की तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। हालांकि घटना के महीनों बीत जाने के बाद भी वन विभाग की जांच की रफ्तार और मुख्य आरोपियों तक पहुँचने की इच्छाशक्ति पर अब गंभीर सवालिया निशान लग रहे हैं। विभाग ने एक १४ चक्का ट्रक और भारी मात्रा में अवैध लकड़ी तो बरामद की लेकिन इस सिंडिकेट की पूरी कडीय़ाँ अभी भी बिखरी हुई हैं।
राजनीतिक गलियारों तक पहुँचे तस्करी के तार
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब सूची में १० वें आरोपी राकेश पिता शिवलाल डहरवाल का नाम सामने आया। राकेश डहरवाल ना केवल पूर्व जिला पंचायत सदस्य है, बल्कि वन सभापति जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी रह चुका है। वन विभाग ने उसे लंबी खींचतान के बाद २९ अप्रैल को गिरफ्तार तो कर लिया था लेकिन विभाग इस रसूखदार आरोपी से सिंडिकेट के अन्य बड़े नामों का खुलासा करवाने में lनाकाम रहा है।
आरोपियों की स्थिति
वन विभाग के द्वारा जारी आधिकारिक पत्र अप.क्र. १२७७३/२० के अनुसार इस मामले में कुल ११ लोगों को नामजद किया गया है। कुल १० आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं एक आरोपी इमरान जो उत्तर प्रदेश का निवासी है और ट्रक का ड्राइवर बताया जा रहा है। वह अभी भी पुलिस और वन विभाग की पकड़ से बाहर है। तस्करी का यह जाल उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश के बालाघाट तक फैला हुआ है। वन विभाग अब तक की जांच में स्थानीय और बाहरी तस्करों के एक मजबूत सांठगांठ का खुलासा नहीं कर पाई हैं।
इन धाराओं के तहत दर्ज है मामला
पकड़े गए आरोपियों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम १९७२ संशोधित २०२२ की धारा २,९,३९,५०,५१,५२,५७ भारतीय वन अधिनियम १९२७ की धारा ३३ क,६६ क,६९ म.प्र. अभिवहन वनोपज नियम २०२२ का नियम ३ के तहत किया है। मामले में १४ चक्का ट्रक की बरामदगी और एक पूर्व जनप्रतिनिधि की गिरफ्तारी यह दर्शाती है कि यह कोई छिटपुट चोरी नहीं बल्कि अंतरर्राज्यीय सिंडिकेट का काम है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच फैले इस नेटवर्क के मुख्य सरगना अभी भी पर्दे के पीछे हैं। जब १० आरोपी पकड़े जा चुके है तो ड्राइवर आरोपी नंबर ११ का अब तक फरार रहना विभाग की इंटेलिजेंस पर सवाल खड़ा करता है।
बहुउपयोगी है खैर की लकड़ी
खैर की लकड़ी जो पान मसाला और औषधीय उपयोग के कारण काला सोना कही जाती है। उसकी तस्करी ने बालाघाट के जंगलों को खोखला कर दिया है। अब देखना यह है कि क्या वारासिवनी वन विभाग इस पूरे सिंडिकेट की तह तक जाकर असली चेहरों को बेनकाब करता है। या यह मामला केवल छोटे मोहरों की गिरफ्तारी तक ही सिमट कर रह जाएगा।
इनका कहना हैं
दूरभाष पर चर्चा में बताया कि खैर की लकड़ी तस्करी के मामले में 11 आरोपी थे जिसमें 10 आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं। इसमें 29 अप्रैल को प्रकरण का एक आरोपी राकेश ड़हरवाल गिरफ्तार हुआ था अभी एक आरोपी फरार चल रहा है वह उत्तरप्रदेश का हैं जिसकी पतासाजी की जा रही है। यह ट्रक हरियाणा के क़ासिम भाई का हैं जिसे लकड़ी लेकर जाना था मामले में विवेचना की जा रही है। गिरफ्तार सभी 10 आरोपी जमानत पर स्वतंत्र हैं।










































