मीडिल ईस्ट में तनाव के कारण सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से एक साल तक सोना ना खरीदने की अपील की है लेकिन इंडस्ट्री में सोने का इस्तेमाल को रोकना लगभग असंभव है। दुनियाभर में सेमीकंडक्टर यानी चिप निर्माण उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है।
स्मार्टफोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक व्हीकल, एआई सर्वर और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बढ़ती मांग के बीच अब यह सवाल भी उठने लगा है कि आखिर चिप बनाने में सोने का इस्तेमाल क्यों किया जाता है। आमतौर पर लोग सोने को केवल आभूषण या निवेश के रूप में देखते हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में इसकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती है।
सेमीकंडक्टर में क्यों होता है सोने का इस्तेमाल
विशेषज्ञों के अनुसार सोना बिजली का बहुत अच्छा संवाहक होता है और इसमें जंग लगने की संभावना बेहद कम होती है। यही कारण है कि सेमीकंडक्टर और माइक्रोचिप्स में इसका इस्तेमाल खास जगहों पर किया जाता है। चिप के अंदर बेहद छोटे इलेक्ट्रॉनिक कनेक्शन को स्थिर और तेज बनाए रखने के लिए गोल्ड प्लेटिंग और गोल्ड वायर का उपयोग किया जाता है।सोने की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लंबे समय तक खराब नहीं होता और हाई-प्रिसिजन इलेक्ट्रॉनिक्स में भरोसेमंद प्रदर्शन देता है। यही वजह है कि डाटा सेंटर, सुपरकंप्यूटर, रक्षा उपकरण और स्पेस टेक्नोलॉजी में इस्तेमाल होने वाली चिप्स में भी सोने का प्रयोग किया जाता है।
एक चिप में कितना सोना लगता है
हालांकि एक सेमीकंडक्टर चिप में सोने की मात्रा बेहद कम होती है, लेकिन बड़े स्तर पर उत्पादन होने के कारण इसकी कुल खपत काफी बढ़ जाती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक एक स्मार्टफोन में औसतन 0.03 से 0.05 ग्राम तक सोना इस्तेमाल हो सकता है। वहीं हाई-एंड सर्वर, मेडिकल उपकरण और इंडस्ट्रियल चिप्स में इसकी मात्रा ज्यादा हो सकती है। कई इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बोर्ड में गोल्ड कोटिंग का इस्तेमाल किया जाता है ताकि कनेक्शन मजबूत और टिकाऊ बने रहें। यही कारण है कि पुराने इलेक्ट्रॉनिक कचरे यानी ई-वेस्ट से भी सोना निकाला जाता है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह सेक्टर
भारत अब सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। सरकार कई बड़ी कंपनियों के साथ मिलकर देश में चिप निर्माण यूनिट स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। ऐसे में सोने समेत कई दुर्लभ धातुओं की मांग आने वाले वर्षों में और बढ़ सकती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि एआई, 5G और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर के विस्तार के साथ सेमीकंडक्टर उद्योग में सोने की रणनीतिक अहमियत और ज्यादा बढ़ने वाली है।













































