बंगाल के नतीजे तय करेगा SIR, विधानसभा चुनाव में दूसरे सारे मुद्दों पर हावी

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का तेवर शुरू से आक्रामक रहा है। तृणमूल कांग्रेस ( TMC ) के एक हालिया विडियो में उनका खास अंदाज दिखा। विडियो में बाएं हाथ में माइक थामे और दाहिने हाथ की मुट्ठी आसमान की ओर उठाए ममता अगले ही पल बाघ-सी दहाड़ती नजर आती हैं।

लड़ाई आसान नहीं

ममता को पता है कि इस बार का विधानसभा चुनाव आसान नहीं है। इस बार उन्हें सिर्फ 15 साल की सत्ता विरोधी लहर से ही नहीं, चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के कारण कई मुस्लिम मतदाताओं के नाम कटने से बनी कठिन परिस्थितियों से भी जूझना पड़ रहा है। बंगाल में ‌BJP का सबसे बड़ा हथियार ध्रुवीकरण है। चूंकि राज्य में 27% मुसलमान हैं, इसलिए मुस्लिम वोटरों की किसी भी क्षति से BJP को फायदा होने की उम्मीद है।

गीत से हमला

ममता ने BJP के मंसूबों पर पानी फेरने के लिए SIR को ही हथियार बना लिया है। वह लगातार कह रही हैं कि चुनाव आयोग की यह पूरी प्रक्रिया BJP के षड्यंत्र का हिस्सा है और पार्टी के निशाने पर बंगाली अस्मिता है। चुनाव के लिए TMC के गीत ‘जोतोई कोरो हमला, आबार जीतबे बांग्ला’ यानी ‘कितना भी हमला करो, फिर जीतेगा बंगाल’ से ममता यह संदेश दे रही हैं कि प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और आयकर विभाग (I-T) की कार्रवाइयों का उन पर असर नहीं पड़ने वाला। ममता अब चुनाव आयोग को भी BJP का हथियार मान चुकी हैं।

सबसे बड़ा मुद्दा

SIR में 91 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। नाम कटने के अलावा लोगों को हुई परेशानियों से इस बार SIR ही सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। BJP ने ममता सरकार पर भ्रष्टाचार के जो आरोप लगाए, वे भी SIR के सामने छोटे पड़ गए हैं। SIR को BJP घुसपैठियों का इलाज बता रही है। लेकिन, ममता कह रही हैं कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद केंद्र सरकार नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (NRC) लाएगी और विस्थापितों को बांग्लादेशी कह कर डिटेंशन कैंप भेज देगी।

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