Champat Rai: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि चंपत राय महासचिव पद से इस्तीफा देने के बाद नाराज हैं। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि (Govind Dev Giri Statement) ने साफ किया है कि दान में चोरी के विवाद के बाद इस्तीफा देने वाले चंपत राय न तो गुस्से में हैं और न ही उन्हें कोई शिकायत है। वे मंदिर प्रबंधन में हो रहे सुधारों का पूरा समर्थन कर रहे हैं।
गोविंद देव गिरि ने बताया कि उन्होंने चंपत राय से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना। उन्होंने राय को एक समर्पित और बेदाग व्यक्ति बताया, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश के लिए लगा दिया। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि चंपत राय से एक चूक यह हुई कि उन्होंने लंबे समय तक कुछ गलत लोगों पर भरोसा किया, जिसकी वजह से दान में गबन का यह पूरा मामला सामने आया।
एसआईटी जांच का मामला
हाल ही में 6 जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार किया गया था। इसके तुरंत बाद चंपत राय का एक पत्र और बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें उन्होंने दान की गिनती में स्टेट बैंक की भूमिका पर सवाल उठाए थे और कहा था कि वे एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही आरोपों का जवाब देंगे। इस पर ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि वे पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं और अयोध्या के संत समाज भी प्रबंधन के नए फैसलों से खुश हैं।
बदलाव की तैयारी में ट्रस्ट
इस विवाद के बाद ट्रस्ट मंदिर प्रबंधन को पूरी तरह पारदर्शी बनाने में जुट गया है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी चुनने के लिए तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई है, जिसमें रिटायर्ड जज और सेना के अधिकारी शामिल हैं।
अब आगामी 22 जुलाई को ट्रस्ट की एक और अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में उन सभी कमियों को हमेशा के लिए दूर करने पर चर्चा होगी, जिनकी वजह से दान की चोरी जैसा बड़ा विवाद खड़ा हुआ और जिस पर भारी राजनीतिक बवाल मचा है। फिलहाल, इस मामले में एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट के बाद आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।










































