Make In India : केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स और लिथियम-आयन बैटरी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई अहम कंपोनेंट्स और मशीनरी पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) में छूट दी है। यह राहत 31 मार्च 2029 तक लागू रहेगी और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती देगी। 8 जुलाई को जारी तीन अलग-अलग अधिसूचनाओं के जरिए सरकार ने डिस्प्ले असेंबली, वायरलेस चार्जिंग मॉड्यूल और लिथियम-आयन सेल निर्माण में इस्तेमाल होने वाले इनपुट्स और मशीनों के आयात को सस्ता कर दिया है। यह छूट 31 मार्च, 2029 तक लागू रहेगी।
सरकार का कहना है कि इस कदम से घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की लागत कम होगी, स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन बढ़ेगा और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
डिस्प्ले असेंबली के 5 अहम कंपोनेंट्स पर छूट
सरकार ने ऑटोमोबाइल, मेडिकल और इंडस्ट्रियल डिस्प्ले असेंबली के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पांच प्रमुख कंपोनेंट्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी है। इनमें सेल, फ्लेक्सिबल प्रिंटेड सर्किट असेंबली (एफपीसीए), बैकलाइट यूनिट, फ्रेम और एनिसोट्रॉपिक कंडक्टिव फिल्म (एसीएफ) शामिल हैं। हालांकि, यह राहत मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच, स्मार्ट मीटर, टीवी पैनल और इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल डिस्प्ले के लिए लागू नहीं होगी।
वायरलेस चार्जिंग मॉड्यूल भी होगा सस्ता
एक अन्य अधिसूचना के तहत मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाले वायरलेस चार्जिंग इंडक्टर कॉइल मॉड्यूल के छह प्रमुख कंपोनेंट्स पर भी 31 मार्च 2029 तक शून्य कस्टम ड्यूटी लागू रहेगी। इनमें नैनो-क्रिस्टलाइन असेंबली, ई-शील्ड, पीईटी लाइनर, पीसी शिम, स्ट्रैंडेड और एनएफसी कॉइल तथा नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) मैग्नेट शामिल हैं।
बैटरी निर्माण के लिए 85 मशीनों को राहत
सरकार ने लिथियम-आयन सेल निर्माण के लिए रियायती कस्टम ड्यूटी वाली मशीनरी की सूची को भी बड़ा विस्तार दिया है। पहले की सूची की जगह अब 85 तरह की कैपिटल मशीनों को शामिल किया गया है। नई सूची में कोटिंग मशीन, वाइंडिंग मशीन, वेल्डिंग सिस्टम, टेस्टिंग इक्विपमेंट, फॉर्मेशन मशीन, ड्राइंग सिस्टम और बैटरी निर्माण में इस्तेमाल होने वाली कई विशेष मशीनें शामिल हैं।
क्या होगा फायदा?
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इससे इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी निर्माण की लागत कम होगी, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और कंपनियां भारत में ज्यादा निवेश करने के लिए प्रोत्साहित होंगी। यह फैसला भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। इससे अहम कंपोनेंट्स और मशीनरी की आयात लागत घटेगी, घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ेगा और स्मार्टफोन समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के स्थानीय निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही, लिथियम-आयन सेल निर्माण के लिए मशीनरी पर मिली राहत घरेलू बैटरी उद्योग में निवेश को भी गति दे सकती है।










































