गलियारे में खड़े वाहनों के बीच से निकालना पड़ रहा शव का स्टेचर
बालाघाट।
सरदार भगत सिंह शासकीय जिला चिकित्सालय में अव्यवस्थाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अस्पताल परिसर में कर्मचारियों के लिए पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था उपलब्ध होने के बावजूद कुछ कर्मचारी अपनी सुविधा के लिए नियमों को दरकिनार कर अस्पताल के पीछे स्थित पोस्टमार्टम कक्ष से मुख्य भवन तक जाने वाले महत्वपूर्ण गलियारे में ही अपने दोपहिया वाहन खड़े कर देते हैं। इसका खामियाजा मरीजों, उनके परिजनों, अस्पताल आने-जाने वाले लोगों और यहां तक कि पोस्टमार्टम संबंधी कार्यों में लगे कर्मचारियों को भी भुगतना पड़ रहा है।अस्पताल के पीछे स्थित पोस्टमार्टम कक्ष से शव को स्टेचर के माध्यम से बाहर ले जाने का यही एक प्रमुख मार्ग है। लेकिन इस गलियारे के दोनों ओर बाइक और स्कूटी खड़ी रहने के कारण स्टेचर निकालने में भारी दिक्कत होती है। कई बार शव लेकर जाने वाले कर्मचारियों को बीच रास्ते में रुकना पड़ता है और वाहन हटने का इंतजार करना पड़ता है। इससे न केवल अस्पताल की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। बल्कि मृतक के परिजनों को भी असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है।
7 जुलाई की शाम सामने आई लापरवाही
7 जुलाई की शाम इस अव्यवस्था का एक और उदाहरण सामने आया। पोस्टमार्टम के बाद शव को स्टेचर पर लेकर बाहर निकाला जा रहा था। लेकिन गलियारे के दोनों छोर पर खड़ी मोटरसाइकिल और स्कूटी के कारण स्टेचर आगे नहीं बढ़ सका। हालात ऐसे बने कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों को स्वयं वाहन मालिकों की तलाश करनी पड़ी और वाहन हटवाने पड़े। काफी मशक्कत के बाद रास्ता खाली हुआ।तब जाकर स्टेचर बाहर निकाला जा सका।
रोज की परेशानी बनी अव्यवस्था
अस्पताल आने वाले लोगों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। लंबे समय से कर्मचारी गलियारे में वाहन खड़े कर रहे हैं। कई बार मरीजों को स्ट्रेचर, व्हीलचेयर और अन्य आवश्यक चिकित्सा उपकरणों को निकालने में भी कठिनाई होती है। बावजूद इसके अस्पताल प्रबंधन द्वारा इस समस्या के समाधान के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।
पार्किंग बनी-लेकिन उपयोग नहीं
गौरतलब है कि जिला अस्पताल परिसर में कर्मचारियों के लिए अलग से पार्किंग की व्यवस्था की गई है।ताकि अस्पताल के मुख्य मार्ग और गलियारे बाधित न हों। इसके बावजूद कुछ कर्मचारी पार्किंग का उपयोग करने के बजाय अपने वाहन पोस्टमार्टम कक्ष के पास और गलियारे में ही खड़े कर देते हैं। इससे अस्पताल की व्यवस्था लगातार प्रभावित हो रही है और आपातकालीन परिस्थितियों में भी आवागमन बाधित हो रहा है।
प्रबंधन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
बार बार सामने आ रही इस अव्यवस्था के बावजूद अस्पताल प्रबंधन की ओर से अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है। यदि समय रहते गलियारे में वाहन खड़े करने पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में किसी गंभीर स्थिति में मरीजों या शवों के आवागमन में और अधिक परेशानी उत्पन्न हो सकती है।
अस्पताल प्रबंधन को गलियारे को पूरी तरह वाहन मुक्त घोषित कर नियमों का सख्ती से पालन कराना तथा उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाना चाहिए।










































