- क्या आपने कभी कल्पना की है कि सुबह की चाय के साथ जिस अखबार को आप पढ़ते हैं, उसे रद्दी में फेंकने के बजाय अगर आप गमले में दबा दें, तो उसमें से एक खूबसूरत हरा-भरा पौधा निकल आए? यह कोई जादुई कहानी नहीं, बल्कि एक हकीकत है। मीडिया जगत में अपने अनोखे प्रयोगों के लिए पहचाने जाने वाला समाचार पत्र ‘दैनिक भास्कर’ हर साल अपने पाठकों के लिए एक ऐसा ही विशेष पर्यावरण अंक लेकर आता है, जो अपने साथ नए जीवन के बीज लेकर आता है।
- ‘बीज वाला अखबार’
- इस अनोखे अखबार को तैयार करने के लिए एक बेहद खास और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इस स्पेशल टेक्नोलॉजी के माध्यम से अखबार के निर्माण के समय ही उसके कागज में अलग-अलग पौधों के बीजों को मिला दिया जाता है। इस बात का पूरा ध्यान रखा जाता है कि प्रिंटिंग की प्रक्रिया में बीजों को कोई नुकसान न पहुंचे और उनकी अंकुरण क्षमता बनी रहे।
- कैसे काम करता है बीज वाला अखबार?
- इसका इस्तेमाल करना बेहद आसान है। सुबह हमेशा की तरह यह विशेष अखबार पढ़िए। पढ़ने के बाद इस अखबार को रद्दी वाले को देने के बजाय अपने घर के किसी गमले या बगीचे की मिट्टी में दबा दीजिए। मिट्टी में दबाने के बाद इसमें नियमित रूप से थोड़ा-थोड़ा पानी दीजिए। कुछ ही दिनों में अखबार का कागज मिट्टी में गलकर जैविक खाद का रूप ले लेता है और उसमें मौजूद बीज अंकुरित होकर एक नए नन्हे पौधे के रूप में बाहर आ जाते हैं।
- 75 लाख पेड़ लगाने का महाअभियान
- इस साल इस हरित बदलाव को और अधिक व्यापक बनाने के लिए दैनिक भास्कर एक राष्ट्रव्यापी महाभियान चला रहा है। इस अभियान के अंतर्गत संस्थान ने देश भर में 75 लाख पेड़ लगाने का महासंकल्प लिया है। इस अनूठी पहल का उद्देश्य न केवल लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है, बल्कि उन्हें सीधे तौर पर प्रकृति को संवारने के काम से जोड़ना भी है।










































