गर्रा में बह रही ज्ञान की गंगा

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वारासिवनी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत गर्रा में श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ की कथा जारी है। जिससे पूरे ग्राम में ज्ञान की गंगा बह रही है ऐसे में बड़ी संख्या में लोग आयोजन में पहुंचकर धर्म लाभ अर्जित कर रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम गर्रा में 11 अप्रैल से श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया है जिसका समापन 18 अप्रैल को हवन पूजन और महाप्रसाद वितरण के साथ किया जायेगा। इस दौरान प्रथम दिन भव्य कलश शोभा यात्रा का आयोजन किया गया जिसमें बैंड बाजे की थाप पर शोभायात्रा ने पूरे ग्राम का भ्रमण कर कार्यक्रम स्थल पर पहुंची जहां पर भागवत बैठकी एवं महाकथा प्रारंभ की गई। जिसमें वृंदावन धाम उत्तर प्रदेश से पधारे पंडित व्यंकटाचार्य शास्त्री जी महाराज के द्वारा व्यास आसन से अपने मुखारविंद से प्रवचन के माध्यम से संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा महापुराण का वाचन किया जा रहा है। जिसमें दूसरे दिन परीक्षित जन्म, भीष्म स्तुति, बारह अवतार, तृतीय दिन सती प्रसंग, ध्रुव प्रसंग, जड़ भरत, प्रहलाद चरित्र, चतुर्थ दिन गजेंद्र मोक्ष, वामन अवतार, अम्बरोष चरित्र एवं कृष्ण जन्म हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पांचवे दिन भगवान कृष्ण की बाल लीला गोवर्धन पूजा की गई इस दौरान जीवंत झांकियां आकर्षण का केंद्र रही जिनके माध्यम से कथा के पात्र को प्रस्तुत किया गया। वही विशेष रूप से कृष्ण जन्म और बाल लीला गोवर्धन पूजा में वृंदावन की झलक देखने मिली इस दौरान उपस्थित जनसमुदाय मंत्रमुग्ध हो गया और भगवान कृष्ण के भजनों पर झूमने लगा। इस अवसर पर आयोजक सुरेश पटले गुणवंता पटले हसन पटले पल्लवी पटले लखन पटले सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण जन मौजूद रहे।

ममता तत्व के आगे भगवान कृष्ण की नतमस्तक है – व्यंकटाचार्य

इस दौरान व्यास आसन से पंडित व्यंकटाचार्य शास्त्री के द्वारा माता यशोदा भगवान कृष्ण को जब रस्सी से बांधने जाती है उसका प्रसंग सुनाते हुए कहा गया कि भगवान कृष्ण से नाराज होकर माता यशोदा उन्हें पकड़ने के लिए दौड़ती है। इस दौरान भगवान कृष्णा आगे और माता यशोदा उनके पीछे आवाज लगाकर दौड़ती है परंतु भगवान कृष्ण बड़ी मुश्किल से माता यशोदा के हाथ में आते हैं। जिन्हें वह घर के आंगन में लगे पेड़ से बांधने के लिए रस्सी लाती है परंतु वह दो उंगली छोटी हो जाती है जिसमें माता यशोदा और रस्सी जोड़ती है परंतु वह फिर छोटी हो जाती है। क्योंकि यशोदा मैया अपनी ममता और वात्सल्य का प्रदर्शन करती है तो वही भगवान कृष्ण ईश्वर तत्व का उपयोग करते हैं। जिसके कारण रस्सी को कितना भी बड़ा करने पर वह दो उगली छोटी पड़ती है ऐसे में यशोदा मैया थक जाती है जिस पर भगवान कृष्ण यह देख कर मां की ममता में बांध ही जाते हैं और उनकी माता रस्सी में उन्हें बांधने में कामयाब हो जाती है। जिसके बाद भगवान कृष्ण अपने पेड़ को गिरा कर आगे बढ़ते हैं और आंगन में खड़े दो वृक्षों को गिरा देते हैं जिससे दो कुमार बाहर निकलते हैं और वह बताते हैं कि वह कुबेर के पुत्र हैं। जिन्हें श्राप दिया गया था और भगवान कृष्ण के द्वारा उन्हें इस श्राप से मुक्ति दी गई है सहित अन्य प्रकार की कथा सुनाकर भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी गई।

ग्राम की खुशहाली और समृद्धि के लिए की जा रही महापुराण – सुरेश

पद्मेश से चर्चा में सुरेश पटेल ने बताया कि ग्राम गर्रा में बीते कई वर्षों से किसी प्रकार का धार्मिक आयोजन नहीं किया गया था। पूर्व में श्रीमद्भागवत का आयोजन हुआ था परंतु कोरोना काल से कोई आयोजन ना होने से बहुत लंबा अंतराल हो गया था ऐसे में ग्राम की खुशहाली समृद्धि और लोगों को धर्म से जोड़ने के लिए श्रीमद् भागवत कथा महापुराण का आयोजन किया गया है। श्री पटले ने बताया कि कार्यक्रम का प्रारंभ 11 अप्रैल से किया गया है जिसमें प्रथम दिन कलश शोभायात्रा निकालकर श्रीमद्भागवत पुराण का वाचन प्रारंभ किया गया है जिस का समापन 18 अप्रैल को राघवी पटले जन्म उत्सव के अवसर पर हवन पूजन कर महाप्रसाद वितरण के साथ किया जाएगा।

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