केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025’ को अधिसूचित कर दिया है। यह कानून 1 जुलाई, 2026 से पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा। इसी दिन से महात्मा गांधी नरेगा (MNREGA) कानून निरस्त हो जाएगा। नई व्यवस्था के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को अब साल में 100 की जगह 125 दिन के रोजगार की गारंटी मिलेगी।
नेशनल रूरल एम्प्लोयमेंट गारंटी एक्ट यानी नरेगा की शुरुआत 2006 में आंध्रप्रदेश से हुई। बाद में इसे पूरे देश में लागू किया गया। अब इसक कानून की जगह Viksit Bharat- Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) Act, यानी 2025 विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार व आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक लागू किया गया है।
सरकार ने इस कानून को ग्रामीण विकास और रोजगार की पुरानी व्यवस्था से एक बड़े ट्रांजिशन के तौर पर पेश किया है। अधिनियम का मकसद सिर्फ काम देना नहीं, बल्कि ग्रामीण आजीविका, उत्पादक परिसंपत्तियों और पंचायत-आधारित विकास को एक नई दिशा देना है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, 30 जून तक चल रहे सभी कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे और मौजूदा जॉब कार्ड भी नई व्यवस्था के तहत मान्य रहेंगे, जब तक नया ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाता।125 दिन की गारंटी, समय पर काम नहीं तो भत्ता भी
नई व्यवस्था की सबसे बड़ी बात यह है कि अब ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 100 की जगह 125 दिन के रोजगार की गारंटी मिलेगा। यदि मांग के बावजूद तय समय में काम उपलब्ध नहीं दिया गया, तो श्रमिक बेरोजगारी भत्ते के हकदार होंगे। इसके साथ ही मजदूरी का भुगतान बैंक या डाकघर खाते में डीबीटी के माध्यम से किया जाएगा और भुगतान साप्ताहिक आधार पर या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिन के भीतर होगा। देरी होने पर मुआवजे का प्रावधान भी रखा गया है।
रिकॉर्ड बजट, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस कार्यक्रम पर ₹95,692.31 करोड़ का बजटीय आवंटन किया है, जिसे अब तक का सबसे बड़ा बजटीय प्रावधान बताया गया है। राज्यों के हिस्से को जोड़कर कुल परिव्यय ₹1.51 लाख करोड़ से अधिक पहुंचने का अनुमान है। सरकार का दावा है कि यह निवेश ग्रामीण आधारभूत ढांचे, रोजगार सृजन और आय बढ़ाने में मदद करेगा।पंचायतें होंगी केंद्र में, पारदर्शिता और स्थानीय योजना पर जोर
अधिनियम में ग्राम पंचायतों को योजना के केंद्र में रखा गया है। रोजगार के लिए आवेदन पंचायत स्तर पर लिए जाएंगे, कार्यों का चयन स्थानीय जरूरतों के हिसाब से होगा और पारदर्शिता के लिए डिजिटल निगरानी, जनता बोर्ड और साप्ताहिक सार्वजनिक प्रकटीकरण की व्यवस्था की गई है। पात्रता, भुगतान, शिकायत निवारण और ट्रांजिशन से जुड़े नियम भी चरणबद्ध तरीके से प्रकाशित किए जा रहे हैं।










































