समाज ने बाजे गाजे और कलश यात्रा के साथ किया स्वागत
पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। नगर में धार्मिक उल्लास और श्रद्धा का एक अभूतपूर्व नजारा उस समय देखने को मिला जब खरतरगच्छ आचार्य श्री जिन पीयूषसागर सूरीश्वर जी महाराज एवं नूतन आचार्य श्री जिन सम्यकरत्न सागर सूरीश्वर जी महाराज का अपने विशाल शिष्य मंडल के साथ वारासिवनी की पावन धरा पर मंगल आगमन हुआ। बालाघाट से विहार करते हुए वारासिवनी पहुंचे इस संघ में कुल ९ पूज्य आचार्य एवं उनके शिष्य शामिल हैं। यह भव्य ससंघ रायपुर से प्रवास करते हुए नागपुर की ओर अग्रसर है ,जहां इस वर्ष आचार्य श्री का पावन चातुर्मास संपन्न होने जा रहा है। आचार्य श्री और उनके शिष्यों के नगर आगमन पर श्री जैन श्वेतांबर संघ वारासिवनी के तत्वावधान में एक भव्य स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। नगर के प्रमुख प्रवेश द्वार दीनदयाल चौक पर सकल जैन समाज और स्थानीय श्रद्धालुओं ने बाजे गाजे और भारी उत्साह के साथ पूज्य संतों की अगवानी की। जैसे ही आचार्यों के चरण वारासिवनी की भूमि पर पड़े पूरा वातावरण गुरुदेव की जय और धार्मिक जयकारों से गुंजायमान हो गया। दीनदयाल चौक पर आत्मीय स्वागत के पश्चात एक विशाल और नयनाभिराम शोभायात्रा रैली निकाली गई। इस शोभायात्रा में जैन समाज के महिला, पुरुष और बच्चे बड़ी संख्या में पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। रैली का मुख्य आकर्षण समाज की मातृशक्तियों के द्वारा सिर पर धारण किया गया मंगल श्रीफल कलश था। कतारबद्ध होकर कलश धारण किए चल रही महिलाएं इस शोभायात्रा की शोभा को चार चांद लगा रही थीं जिसे देखने के लिए मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए यह भव्य शोभायात्रा दादाबाड़ी पहुंची जहां इसका विधि विधान से समापन किया गया। वारासिवनी में अल्प विश्राम और गुरुवार को धर्मसभा के उपरांत यह पूज्य ससंघ अपने अगले पड़ाव कटंगी के लिए रवाना होगा। चातुर्मास हेतु नागपुर जा रहे संतों के इस प्रवास से वारासिवनी का संपूर्ण जैन समाज स्वयं को धन्य महसूस कर रहा है और संपूर्ण नगर का माहौल पूरी तरह से धर्ममय हो चुका है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाज के स्वजातीय बंधु मौजूद रहे।
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