पद्मेश न्यूज। लालबर्रा। लालबर्रा कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता व कांग्रेसी नेता रवि अग्रवाल ने शनिवार को अपनी ही पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है और उन्होंने अपना इस्तीफा औपचारिक रूप से ब्लाक कांग्रेस कमेटी लालबर्रा अध्यक्ष मनीराम भोयर को सौंप दिया है। उनके इस अचानक उठाये गये कदम से नगर में राजनैतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। वहीं वरिष्ठ कांग्रेसी रवि अग्रवाल ने सन् १९८० में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की थी और अपने ४५ से अधिक वर्षों के लंबे राजनैतिक जीवन में उन्होंने संगठन के बीस सूत्रीय सदस्य, जिला महामंत्री एवं ब्लॉक महामंत्री, पार्टी प्रवक्ता, दूरसंचार सदस्य, सांसद प्रतिनिधि एवं विधानसभा प्रतिनिधि सहित विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहकर पार्टी का नेतृत्व किया। चर्चा में वरिष्ठ कांग्रेसी रवि अग्रवाल ने बताया कि मैं लंबे समय से कांग्रेस पार्टी की विचारधारा से जुडक़र पूरी निष्ठा के साथ काम रहा था और मैं विगत ५ वर्षों से पार्टी में लगभग निष्क्रिय भूमिका में रहा हूं इसलिये जब संगठन में सक्रिय न हों, तो पद पर बने रहना उचित नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय नेतृत्व और संगठन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ समय पूर्व जब उनकी दुकान टूटी, तब विपत्ति के उस दौर में कांग्रेस का कोई भी बड़ा नेता या कार्यकर्ता उनके साथ खड़ा नहीं हुआ। इस उपेक्षा से उनका मन काफी आहत था, जिसके कारण उन्होंने संगठन से दूरियां बना ली थी। श्री अग्रवाल ने पूर्व के घटनाक्रमों को स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने ६० वर्ष की आयु पूर्ण होने पर ही सार्वजनिक मंचों के माध्यम से घोषणा कर दी थी कि वे अब मंच, माला और माइक की राजनीति से दूर रहेंगे। हालांकि सामाजिक दबाव और जनता की आवाज को उठाने के लिए वे लगातार सक्रिय बने रहे परंतु अब पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल न होने पर लगने वाले तरह-तरह के आरोपों-प्रत्यारोपों से बचने के लिए उन्होंने औपचारिक रूप से इस्तीफा देना ही बेहतर समझा है। वहीं कांग्रेस छोडऩे के बाद क्या वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामेंगे? इस सवाल पर रवि अग्रवाल ने कहा कि उम्र के इस पड़ाव में दूसरी पार्टी में जाने का फिलहाल उनका कोई विचार नहीं है। भाजपा में शामिल होने की अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे कोई नरेंद्र मोदी (प्रधानमंत्री) या जे.पी. नड्डा तो भाजपा में बुलाने आयेगे नहीं। बालाघाट विधानसभा में भाजपा का मतलब गौरीशंकर बिसेन हैं और हमने जीवन भर सिध्दांतों की लड़ाई लड़ते हुए गौरीशंकर बिसेन का निरंतर विरोध किया है। ऐसे में वे हमें अपनी पार्टी में स्वीकार करेंगे या नहीं, यह सोचना भी बेमानी है। हालांकि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विचारधारा के प्रति सकारात्मक संकेत जरूर दिए, लेकिन भाजपा में शामिल होने की बात से साफ इंकार किया। साथ ही यह भी कहा कि कांग्रेस विधायक श्रीमती अनुभा मुंजारे की ऐतिहासिक जीत और पार्टी में बिखराव के सवाल पर श्री अग्रवाल ने संगठन को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में अनुभा मुंजारे की २९-३० हजार वोटों से जो बड़ी जीत हुई थी, वह जनता का गौरीशंकर बिसेन के प्रति आक्रोश और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के २०-३० सालों के कड़े संघर्ष व तपस्या का परिणाम है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा इतने बड़े अंतर से जीतने के बाद वर्तमान नेतृत्व को यह गलतफहमी हो गई है कि उनका जनाधार बहुत बड़ा है। वे इसे केवल अपनी व्यक्तिगत जीत मान बैठे हैं। जबकि यह कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं के वर्षों के संघर्ष की सामूहिक जीत थी।










































