मासूम से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को 20 वर्ष की कठोर कारावास:10 हजार रुपये अर्थदंड

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लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश गौतम सिह मरकाम की अदालत ने एक मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी के मामले आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई यह आरोपी सुनील पिता धूपलाल विश्वकर्मा 21 वर्ष वार्ड नंबर 21 लामता थाना लामता निवासी है। जिसे विद्वान अदालत ने 10 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किये है।

मामला लामता थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार 30 मई 2024 को नाबालिग की मां सुबह घर से बाहर गई थी। घर पर बच्चे मौजूद थे। इसी दौरान आरोपी सुनील विश्वकर्मा नाबालिग को खाना बनाने के बहाने से अपने साथ घर ले लाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। शाम को उसने हिम्मत जुटाकर अपनी मां को पूरी आपबीती बताई। बेटी की बात सुनकर मां के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने तत्काल पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। लामता पुलिस ने सुनील विश्वकर्मा के विरुद्ध भादवि की धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया और मामले की गंभीरता से विवेचना करते हुए साक्ष्य जुटाए और आरोपी सुनील विश्वकर्मा के विरुद्ध न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किये। यह मामला लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश गौतमसिह मरकाम की अदालत में चला। विद्वान अदालत ने विचारण के दौरान आए साक्ष्यों के आधार पर आरोपी सुनील विश्वकर्मा को दोषी पाया और उसे धारा 376(2) च भादवि में 10 वर्ष का कठोर कारावास एवं 4 हजार रुपये अर्थदंड तथा पॉक्सो एक्ट में 20 वर्ष का कठोर कारावास एवं 6 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किये। धारा 376 एबी भादवि की सजा को पॉक्सो एक्ट की सजा में समाहित किया गया।प्रकरण में अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक कपिल कुमार डहेरिया के द्वारा प्रभावी पैरवी की।

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