ब्रिटेन, स्पेन और इटली के कपल्स ने हिंदू रीति-रिवाज से लिए सात फेरे, उज्जैन में अग्नि को साक्षी मानकर थामा एक-दूसरे का हाथ

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उज्जैन: भारतीय संस्कृति, योग और सनातन परंपरा की गूंज एक बार फिर सात समंदर पार तक सुनाई दी है। मोक्षदायिनी मां शिप्रा के पावन तट पर स्थित आश्रम में एक ऐसा अनोखा और भव्य विवाह समारोह आयोजित किया गया, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ब्रिटेन, इटली और स्पेन से भारत आए तीन विदेशी जोड़ों ने पाश्चात्य संस्कृति के दायरों को छोड़कर पूरी तरह से सनातन पद्धति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अग्नि को साक्षी मानकर एक-दूसरे का हाथ थामा है।

डॉ. ओमानंद महाराज के सानिध्य में हुआ आयोजन

यह मांगलिक आयोजन गुरुदेव डॉ. ओमानंद महाराज के सानिध्य में संपन्न हुआ। इस अंतरराष्ट्रीय विवाह समारोह के तहत इटली की ईवा का विवाह उनके देश के ही मैसिमिलियानो के साथ हुआ, जिन्हें क्रमशः ‘मां दर्पण आनंद’ और ‘बलराम आनंद’ नाम दिया गया। वहीं, इटली की ही जेसिका (मां सीता आनंद) और लुका (राम आनंद) परिणय सूत्र में बंधे। इसके अलावा, स्पेन की इनमा (मां शांति आनंद) और इंग्लैंड के मार्क (प्रकाशानंद) भी सनातन परंपरा के बंधन में बंध गए। आश्रम परिसर में भारतीय विवाह की हर एक रस्म हल्दी, फेरे, और विधि-विधान—को पूरी निष्ठा के साथ निभाया गया, जिसमें ढोल-नगाड़ों की थाप पर भारतीय बारातियों और विदेशी मेहमानों का उत्साह देखते ही बनता था।योग और ध्यान की शिक्षा लेने आए थे जोड़े

पश्चिमी देशों में आमतौर पर विवाह को एक कानूनी अनुबंध के रूप में देखा जाता है, लेकिन इन विदेशी नागरिकों का भारतीय संस्कृति के प्रति झुकाव उनके आध्यात्मिक सफर का हिस्सा रहा है। ये सभी विदेशी जोड़े भारत में योग और ध्यान की शिक्षा प्राप्त करने आए थे। यहां के जीवन मूल्यों, संस्कारों, और आपसी सम्मान की गहरी छाप उनके मन पर पड़ी। भारतीय दर्शन में विवाह को केवल एक समझौता नहीं बल्कि आत्माओं का दिव्य संबंध और सोलह संस्कारों में से पंद्रहवां सबसे पवित्र ‘पाणिग्रहण संस्कार’ माना गया है, जिससे प्रभावित होकर इन्होंने हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह करने का यह ऐतिहासिक निर्णय लिया।

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