भारत में टेलीविजन प्रोग्रामिंग ने एक लंबा सफर तय किया है। यह महज एक प्रयोग से शुरू होकर एक फलते-फूलते इंडस्ट्री में बदल गई है, जो आज बहुत से लोगों की जिंदगी में अहम भूमिका निभाती है। आज यह संचार, मनोरंजन और शिक्षा के सबसे प्रभावशाली माध्यमों में से एक है। लेकिन एक समय पर लोगों के इमोशन से भी जुड़ा हुआ था। 80 से 90 के दशक में टीवी पर कई ऐसे शोज आए, जो क्रांति लाने से कम नहीं थे। सही मायने में टीवी अपना काम कर रही थी। समाज में बदलाव आ रहा था। लोग एक्टर्स की जिंदगी से कनेक्ट कर रहे थे। आज ‘संडे सिनेमा’ में हमी उस दौर के एक ऐसे ही शो की बात करेंगे, जो दूरदर्शन पर प्रसारित होता था।
हालांकि, आज टेलीविजन पर अलग-अलग तरह के कार्यक्रम दिखाए जाते हैं, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब न्यूज बुलेटिन या ‘कृषि दर्शन‘ ही सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले शो हुआ करते थे। लेकिन 80 के दशक की शुरुआत में सब कुछ बदल गया, जब स्क्रिप्टेड टीवी शो, जिन्हें ‘सीरियल’ कहा जाता है, दिखाए जाने लगे। ‘हम लोग’ को हिंदी का पहला भारतीय टीवी सीरियल माना जाता है, जिसने दर्शकों की संख्या का ऐसा रिकॉर्ड बनाया जिसे आज के हिट शो भी नहीं छू पाए हैं।










































